Friday, November 25, 2011

Khayal Khaali hi rehta hai

खयाल खाली ही रहता है अक्सर...
पर यादें सोचने को मजबूर कर देती हैं...
याद आती तो है... पर मैं याद करता हूँ किसको??


मुस्कुराती आँखों से झांकते काजल को...
या काजल की आड़ में छुपे भोलेपन को...

सुनहरे चेहरे पर पड़ती उजली धूप को...
या उसी उजली धूप में चमकती बिंदिया को...

हँसी से भरी तुम्हारी बातों को...
या बातों से भरे तुम्हारे नखरो को...

साथ बिताये जन्मदिन पर दोगुनी हुई खुशियों को...
या मोमबत्तियो की रौशनी को दुगना करते तुम्हारी मुस्कान को...

मोर पंखो सी दिखने वाली तुम्हारी उस हरी कुर्ती को...
या कानो पर शैतानी करते तुम्हारे उन हरे झुमको को...

नाराज़ होने की झूठी कोशिश करती आँखों को...
या सच में नाराज़गी से भरी चुप्पी को...

सच तो सिर्फ इतना है...
मुझसे जुड़ी ऐसी कोई चीज़ नहीं... जिससे तुम्हारी बातें न हो...
मुझसे जुदा वो सब कुछ है... जिसमे तुम्हारी यादें न हो...

ख्याल खाली ही रहता है अक्सर...
पर तुम्हारी यादें सोचने को मजबूर कर देती हैं...
याद आती तो बेहद है... और मैं याद करता हूँ सिर्फ तुमको...

Friday, August 5, 2011

Kab tak chupaoge

"क्या हाल चाल?" कहकर दोस्तों से मिलते हैं हम...
"बस बढियां, तू सुना" कह मुस्कुराते हैं हम...
बातों ही बातों में अपनापन जताते हैं हम...
और बीती बातों को याद कर खिलखिलाते हैं हम...

कुछ ही दिन पहले एक पुराने, काफी करीबी, दोस्त से मिलना हुआ...
उसने पूछा "कैसे हो" हमने कहा "बस सब आपकी दुआ"...
न जाने क्यूँ उसने दोबारा पूछा... "सच बताओ कैसे हो?"
तभी आँखें भर आई और एक अनकही कमी का एहसास हुआ...

बस बढियां कह झूठे ही मुस्कुराते...
फिर सोची समझी साजिश के तेहत की इधर उधर की बातें...
खुशनुमा कहानियां सुना हम करते रहे बात...
खोखली मुस्कराहट और नकली खिलखिलाहट के बीच बीती वो मुलाकात...

मन ने हमसे पूछा "क्या हुआ दोस्त तुम तो खुद को खुश को बताते थे"...
जो होगा अच्छा ही होगा कहकर खुद को समझाते थे...
आँखों को छलकने न देंगे... इसी कोशिश में बीती सारी रात...
सुबह होने पे मन ने कहा... "कब तक छुपाओगे अपने जज़्बात"...

It is only when a really close friend asks you, "how you are?" that you realise whether you are truly happy or not...

Sunday, June 26, 2011

Tumne aur Maine

छलकती हुई आँखों को मेरी... हसना सिखाया है तुमने...
नम आँखों को अपना चुका था.. आंसुओं को मुस्कान बनाया है तुमने...

दिल के टुकड़े बटोर रहा था... टुकड़ो में प्यार जगाया है तुमने...
रोते हुए इस दिल को मेरे... खुल कर जीना सिखाया है तुमने...

हार चुका था जीवन से मैं... लड़ना सिखाया है तुमने...
ज़िन्दगी को दुश्मन समझता था मैं... उससे दोस्ती करायी है तुमने...

टूटी थी हिम्मत जब भी मेरी... विश्वास मुझमे जगाया है तुमने...
किस्मत जो हँसा करती थी मुझपे... उसे आज़माना सिखाया है तुमने...

ख्वाइशें तो अपनी बताती मुझको... पर कभी कुछ मुझसे माँगा न तुमने...
उपरवाला कभी बुरा नहीं करता... ये भरोसा दिलाया है तुमने...

खुश रखूँगा सारी ज़िन्दगी... वादा यही किया था तुमसे...
हँसी को चेहरे का हिस्सा बना दूं... मांगी यही दुआ थी मैंने...

काश हर दुआ कबूल हो जाती... काश हर वादा पूरा हो पाता...
माफ़ करना बदकिस्मती को हमारी... मुस्कुराते थे तुम... पर रुलाया मैंने...