"क्या हाल चाल?" कहकर दोस्तों से मिलते हैं हम...
"बस बढियां, तू सुना" कह मुस्कुराते हैं हम...
बातों ही बातों में अपनापन जताते हैं हम...
और बीती बातों को याद कर खिलखिलाते हैं हम...
कुछ ही दिन पहले एक पुराने, काफी करीबी, दोस्त से मिलना हुआ...
उसने पूछा "कैसे हो" हमने कहा "बस सब आपकी दुआ"...
न जाने क्यूँ उसने दोबारा पूछा... "सच बताओ कैसे हो?"
तभी आँखें भर आई और एक अनकही कमी का एहसास हुआ...
बस बढियां कह झूठे ही मुस्कुराते...
फिर सोची समझी साजिश के तेहत की इधर उधर की बातें...
खुशनुमा कहानियां सुना हम करते रहे बात...
खोखली मुस्कराहट और नकली खिलखिलाहट के बीच बीती वो मुलाकात...
मन ने हमसे पूछा "क्या हुआ दोस्त तुम तो खुद को खुश को बताते थे"...
जो होगा अच्छा ही होगा कहकर खुद को समझाते थे...
आँखों को छलकने न देंगे... इसी कोशिश में बीती सारी रात...
सुबह होने पे मन ने कहा... "कब तक छुपाओगे अपने जज़्बात"...
It is only when a really close friend asks you, "how you are?" that you realise whether you are truly happy or not...
