Sunday, June 26, 2011

Tumne aur Maine

छलकती हुई आँखों को मेरी... हसना सिखाया है तुमने...
नम आँखों को अपना चुका था.. आंसुओं को मुस्कान बनाया है तुमने...

दिल के टुकड़े बटोर रहा था... टुकड़ो में प्यार जगाया है तुमने...
रोते हुए इस दिल को मेरे... खुल कर जीना सिखाया है तुमने...

हार चुका था जीवन से मैं... लड़ना सिखाया है तुमने...
ज़िन्दगी को दुश्मन समझता था मैं... उससे दोस्ती करायी है तुमने...

टूटी थी हिम्मत जब भी मेरी... विश्वास मुझमे जगाया है तुमने...
किस्मत जो हँसा करती थी मुझपे... उसे आज़माना सिखाया है तुमने...

ख्वाइशें तो अपनी बताती मुझको... पर कभी कुछ मुझसे माँगा न तुमने...
उपरवाला कभी बुरा नहीं करता... ये भरोसा दिलाया है तुमने...

खुश रखूँगा सारी ज़िन्दगी... वादा यही किया था तुमसे...
हँसी को चेहरे का हिस्सा बना दूं... मांगी यही दुआ थी मैंने...

काश हर दुआ कबूल हो जाती... काश हर वादा पूरा हो पाता...
माफ़ करना बदकिस्मती को हमारी... मुस्कुराते थे तुम... पर रुलाया मैंने...

1 comment:

  1. nicely written ......its good to have someone so good......keep up the good work..:)

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