Sunday, May 17, 2009

Aakhir kya kami hai?

बैंगलोर में रवीवार की छुट्टी मना रहे थे,
इसी बहाने चादार ताने,
भरी दोपहर तक सो रहे थे.

खिड़कियों के परदे लगा रखे थे,
FM पर गाने चला रखे थे,
और उन्ही गानो को मन मे गुनगुना रहे थे

ऐसे दिन मे क्या कमी है? कुछ भी तो नहीं...

आँखे बंद हुई ही थी की कुछ आवाजें आई,
परदो की सुराख से खिड़की के बहार हमने नज़रें दौड़ाई...

निक्कर पहने कुछ बच्चे टायर दौड़ा रहे थे,
तो दूसरी ओर कुछ लोग खुद दौड़ते नज़र आ रहे थे
पास वाली चाची ने अपने बच्चो को आवाज़ लगायी,
बारिश मे भीगे तो होगी पिटाई.

ये बारिश हैं, और उसके आने की हलचल.

आसमान पर बदल ऐसे छाए जैसे बड़े दिनों बाद दोस्तों से मिलने आये हो,
हवाएं इतनी तेज़ मनो बारिश से बचने घर भाग रही हो,
खड़खडाती खिड़कियाँ अपने बंधन का एहसास दिला रही हो,
और पेड़ अपनी चमक से अपने नए जेवर दिखला रहे हो.

इस बारिश मे क्या कमी है? कुछ नहीं.

पर ये बारिश अकेले न आई थी,
साथ बीती यादें और अधूरे सपने भी लायी थी.

बचपन की वो बारिश... कीचड़ से सने कपडे...
और फूटबाल मैच जीतने की ख़ुशी...
इस बारिश मे क्या कमी थी? कुछ नहीं...

कॉलेज की वो बारिश... ब्रिज पर चलती तेज़ हवाएं...
और हवाओं मे गूंजते अन्ताक्षरी के गाने...
इस बारिश मे क्या कमी थी? कुछ नहीं...

साथी के साथ की बारिश... हॉस्टल से क्लास करने पैदल जाना...
एक ही छतरी से एक दुसरे को भीगने से बचाना...
इस बारिश मे क्या कमी थी? कुछ नहीं...

बारिश तो आज भी वही है...
पर वो ख़ुशी क्यूँ नहीं है...
बादलों को देख इश्वर का एहसास क्यूँ नहीं होता...
तेज़ हवाओं से साँसे तेज़ क्यूँ नहीं होती...
पेडो की चमक से आँखों क्यूँ नहीं चमकतीं...
बाहर की हलचल से मन मे हलचल क्यूँ नहीं होती...

बारिश को देख जो मन कभी था नाचता...
अकेला ही नहीं साथ था दूसरो को नचाता...
आज वही मन बारिश को देख क्यूँ होता है बेबस...
खुद की आँखों से होती बारिश को है नहीं रोक पता...

बारिश तो वही है... पर फिर भी कुछ कमी है...
आखिर क्या कमी है? शायद इसका जवाब कभी मिल जाये...
शायद वो जवाब बारिश की परिभाषा बदल पाए...

बारिश तो वही है... पर फिर भी कुछ कमी है...
गर सच मे ये बारिश वही है... तो आखिर क्या कमी है...???

3 comments:

  1. great poem! but the Hindi took a little extra effort :-(

    The way you have described the happiness in rain...Chamakte hue ped..and naachta mann...
    I love that...its so what I feel everytime I see rain..

    Rain symbolizes bliss...dont lose it...even if u have to join those kids with the tyre!

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  2. this is just good one
    in rain all have some or more great memories
    i remember also those

    here match of football is catchy to me
    because i like football in rain very much and played a lot in ramanuj dyal hostel in meerut
    college............
    good content....

    rain is same as it was earliar but there is some change in ours ........if we want to enjoy just forget everthing and "dub jao is barish ke pani mai or lagao a great header to football "........

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  3. i think this is ur best :) simple; lyrical and mesmerizing

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